लोकसभा चुनाव 2024 में पूर्णिया के सीट पर चुनाव लड़ने के लिए कांग्रेस नेता पप्पू यादव अडिग हैं। उन्होंने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद से अपना मूड बदलने की गुहार लगाई है। कहा है कि महागठबंधन के हित में अपने निर्णय पर फिर से विचार करें। इस बीच पप्पू यादव ने अपने नामांकन का प्रोग्राम बदल दिया है। अब 4 अप्रैल को नॉमिनेशन दाखिल करने की बात कही है पप्पू यादव ने इसका कारण भी बता दिया है। हालांकि, इस बात को लेकर संशय अब भी बरकरार है कि वे कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव लड़ेंगे या निर्दलीय। कांग्रेस नेता ने लालू प्रसाद को बिहार में इंडिया गठबंधन का बड़ा भाई भी बताया है। राजद ने इस सीट पर हाल ही में नीतीश कुमार की पार्ट जेडीयू को छोड़कर आई बीमा भारती को पूर्णिया से टिकट दिया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने अपनी बात रखी है। कहा है कि देश भर में फैले पूर्णिया लोकसभा क्षेत्र के साथी मेरे जन नामांकन में शामिल होना चाहते हैं, उनकी सुविधा के लिए पूर्णिया की महान जनता द्वारा प्रस्तावित नामांकन तिथि 2 अप्रैल की जगह 4 अप्रैल हो गया है। आप सब इसमें शामिल हो, आशीष दें। बिहार में INDIA गठबंधन के बड़े भाई राज़द के प्रमुख आदरणीय लालू जी से पुनः आग्रह है कि वह गठबंधन हित में पूर्णिया सीट पर पुनर्विचार करें, कांग्रेस के लिए छोड़ दें।
कांग्रेस की परंपरागत पूर्णिया लोकसभा सीट इस बार सीट शेयरिंग के बाद कांग्रेस के पाले से राजद के पाले में चली गयी है। आजादी के बाद से ही इस सीट पर कांग्रेस चुनाव लड़ती रही है। पहली बार कांग्रेस को गठबंधन धर्म की गांठ मजबूत करने के लिए यह सीट राजद को दे दी गयी है। राजद ने इस सीट पर दबंग अवधेश मंडल की पत्नी बीमा भारती को उतारा है। बीमा भारती हाल ही में जेडीयू छोड़कर राजद में आई हैं। कांग्रेस के टिकट के लिए अपनी नौ साल पुरानी पार्टी का विलय करने वाले राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव सियासी चुनौती का सामना कर रहे हैं। समर्थकों के दवाब में उन्होंने चुनाव लड़ने का निर्णय लेते हुए दो अप्रैल को नामांकन पत्र दाखिल करने का ऐलान किया है। समर्थकों की मानें तो वह कांग्रेस से ही चुनाव लड़ेंगे। इधर, राजद प्रत्याशी बीमा भारती भी तीन अप्रैल को नामांकन पत्र दाखिल करने वाली हैं। पूर्व सांसद पप्पू सिंह एक अप्रैल को पूर्णिया पहुंच रहे हैं। उनके भी चुनावी मैदान में उतरने के कयास उनके समर्थक लगा रहे हैं। पूर्णिया में फिलहाल पांच नाजिर रसीद कटाई गई है।
निर्दलीय प्रत्याशी के तौर भी जीत चुके हैं चुनाव
पूर्णिया से एक बार विधायक, दो बार सांसद होने के साथ एक बार मधेपुरा से सांसद रह चुके पप्पू यादव ने समर्थकों के दवाब में चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। हालांकि, उनके समर्थकों की मानें तो कांग्रेस के सिंबल से ही वह चुनाव लड़ेंगे। पूर्णिया सीट से वह बतौर निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव जीतकर सांसद बन चुके हैं। उनकी पत्नी रंजीत रंजन भी कांग्रेस से राज्यसभा सांसद हैं।
पहली बार कांग्रेस में हुए शामिल
पप्पू यादव पहली बार कांग्रेस में शामिल हुए हैं। सपा और राजद में रहने के बाद 2015 में उन्होंने जाप पार्टी बनाई। पूर्णिया लोकसभा सीट से कांग्रेस से चुनाव लड़ने के लिए एक सप्ताह पहले वह पटना होते दिल्ली पहुंचे। पटना में उन्होंने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद एवं तेजस्वी यादव से मुलाकात की। इसके बाद सीधे वह दिल्ली गए। जहां कांग्रेस के शीर्ष नेता की मौजूदगी में उन्होंने जाप का कांग्रेस में विलय किया। मगर सात दिन बाद ऐसी सियासी चुनौती का सामना करना पड़ेगा, उन्होंने सोचा भी नहीं होगा।
समर्थकों के दवाब में लिया फैसला
जाप का कांग्रेस में विलय करने के बाद पूर्णिया लौटे पप्पू यादव पिछले कुछ दिनों से लगातार अपने समर्थकों के बीच घिरे हुए थे। अब तक शीट शेयरिंग नहीं होने के कारण वह चुप रहे। शीट शेयरिंग होने के बाद जब यह सीट राजद के खाते में चली गयी तो उनके समर्थकों ने उनपर चुनाव लड़ने का दवाब बनाया। समर्थकों के दवाब में आकर उन्होंने चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। शुक्रवार को उनके समर्थकों ने उनकी गाड़ी के सामने लेटकर प्रदर्शन किया। समर्थकों के द्वारा चुनाव लड़ने का दवाब बनाने के बाद उन्होंने शनिवार को दो अप्रैल को नामांकन करने का ऐलान कर दिया।
कांग्रेस नहीं छोड़ेगी परंपरागत सीट, नेतृत्व के निर्णय का इंतजार : पप्पू यादव
पप्पू यादव ने कहा कि कांग्रेस पूर्णिया की परंपरागत सीट है। अभी भी कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के निर्णय का इंतजार है। उनके समर्थकों का चुनाव लड़ने का दवाब है। वह कांग्रेस के झंडा को बुलंद करेंगे। वह एक पार्टी से जुड़े हुए हैं इसलिए मर्यादा में ही रहकर बात करेंगे। जनता की आवाज का भी उन्हें ध्यान रखना है। वह दो को नामांकन दाखिल करेंगे।
पूणिया सीट पर सामाजिक समीकरण
पूर्णिया लोकसभा सीट के छह विधानसभा में कुल 18.90 लाख मतदाता हैं। इसमें 60 फीसदी मतदाता हिन्दू, जबकि 40 फीसदी मतदाता मुस्लिम हैं। हिन्दू मतदाताओं में पांच लाख एससी-एसटी, बीसी व ओबीसी मतदाता हैं। यादव डेढ़ लाख, ब्राह्मण सवा लाख व राजपूत मतदाताओं की संख्या सवा लाख से अधिक हैं। इसके अलावा एक लाख अन्य जातियों के मतदाता हैं। मुस्लिम मतदाताओं की संख्या लगभग 5 लाख है। कसबा, कोढ़ा व बनमनखी में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अधिक है। बनमनखी में यादव मतदाता सर्वाधिक हैं। ब्राह्मण व राजपूत मतदाता धमदाहा, रुपौली व पूर्णिया में हैं। एससी-एसटी, बीसी व ओबीसी मतदाता बनमनखी व कोढ़ा में अधिक हैं। इस सीट पर माय फेक्टर चल सकता है। मुस्लिम और यादव वोट गोलबंद हो सकते हैं। हालांकि, एससी-एसटी व बीसी व ओबीसी वोटर भी काफी हैं, जिनकी इस चुनाव में अहम भूमिका होगी। ब्राह्मण व राजपूत वोटरों की भूमिका भी निर्णायक रहेगी।
