बिहार की 40 लोकसभा सीटों में कुछ गिनी-चुनी सीटों पर देश की नजर है जिनमें सीवान शामिल है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के दिवंगत नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन की पत्नी हेना शहाब सीवान से इस बार निर्दलीय लड़ रही हैं। हेना शहाब पहले तीन बार आरजेडी के टिकट पर लड़ी हैं लेकिन हर बार हार जाती हैं। इस बार लालू यादव के ऑफर को ठुकराकर हेना निर्दलीय उतरी हैं। हेना शहाब के प्रचार में एक मजेदार चीज दिख रही है। हेना के साथ भगवा और पीला गमछा पहने लोग घूम रहे हैं। आम तौर पर भगवा गमछा का इस्तेमाल संघ और भाजपा से जुड़े लोग करते हैं जबकि पीला गमछा का उपयोग सवर्ण राजनेता करते हैं। जहानाबाद से निर्दलीय लड़ रहे आशुतोष कुमार के समर्थक भी पीला गमछा पहनते हैं जो लंबे समय से भूमिहार समाज के एक नेता के तौर पर खुद को स्थापित करने की लड़ाई लड़ रहे हैं।
सीवान में हेना शहाब के पीछे भगवा और पीला गमछाधारियों के घूमने का राजनीतिक मतलब और भी गहरा है। सीवान में इस बार भाजपा खुद नहीं लड़ रही बल्कि जेडीयू का कैंडिडेट है। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के ओमप्रकाश यादव ने हेना शहाब को हराया था। 2009 में हेना को ओमप्रकाश ने निर्दलीय ही हरा दिया था। 2019 के चुुनाव में एनडीए में यह सीट जेडीयू को मिल गई और उसने कविता सिंह को लड़ाया जो जीत गईं। 2024 में कविता सिंह का टिकट काटकर नीतीश कुमार ने विजयलक्ष्मी कुशवाहा को लड़ाया है जो अपने पति रमेश कुशवाहा के साथ उपेंद्र कुशवाहा की रालोमो को छोड़कर मार्च में जेडीयू में शामिल हुई हैं। अब कविता सिंह के करीबी लोग हेना शहाब के साथ घूम रहे हैं।
हेना शहाब के साथ भगवा गमछा पहने लोगों के घूमने को ऐसे पेश किया जा रहा है जैसे भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े लोग भी समर्थन में हैं क्योंकि सीट जेडीयू को मिली है। पीला गमछा को लोग हेना को सवर्ण के समर्थन से जोड़कर दिखा रहे हैं क्योंकि जेडीयू की कैंडिडेट कुशवाहा हैं और जिनका टिकट कटा है वो राजपूत। भगवा और पीला गमछा के सस्पेंस का समाधान करने के लिए लाइव हिन्दुस्तान ने भाजपा के जिलाध्यक्ष संजय पांडेय से संपर्क किया तो उन्होंने हड़बड़ी में कहा कि ये सब बोगस लोग हैं। पांडेय ने कहा कि हेना के साथ उन्हीं के लोग हैं। उन्होंने कहा कि अधिकांश मुसलमान लोग ही भगवा गमछा पहनकर हेना के साथ घूम रहे हैं। संजय पांडेय ने दावा किया कि भाजपा या संघ के लोग हेना के साथ नहीं हैं।
आरजेडी ने शहाबुद्दीन को भुला दिया, शोकसभा तक नहीं की; सीवान से निर्दलीय लड़ने पर बोलीं हिना शहाब
आरएसएस के जिला संघ चालक डॉ. विनय कुमार सिंह ने इसी बात को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि शहाबुद्दीन के शुरुआती दौर में लेफ्ट संगठन आईपीएफ के लोग सीवान में जमीन कब्जा अभियान चलाते थे। सवर्णों की जमीन बड़े पैमाने पर कब्जा हो रही थी। इसी आईपीएफ से शहाबुद्दीन लड़ते थे। जमीन बचाने के लिए कई सवर्ण शहाबुद्दीन के साथ हो गए थे। सिंह कहते हैं कि हेना शहाब के साथ आज जो लोग भगवा या पीला गमछा पहनकर भ्रम फैला रहे हैं दरअसल वो सब शहाबुद्दीन के जमाने से उनके ही साथ हैं। सिंह ने स्पष्ट कहा कि संघ का कोई भी कार्यकर्ता हेना शहाब के ना समर्थन में है, ना उनके साथ घूम रहा है।
जब पीएम मोदी की रैली में आई रुकावट; खंभे पर चढ़ गए युवक, फिर प्रधानमंत्री ने की ये अपील
सीवान में 25 मई को लोकसभा चुनाव के छठे चरण में मतदान है और उससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यहां मंगलवार को रैली हुई है। गोरेयाकोठी में आयोजित जनसभा में पीएम मोदी ने सीवान में जेडीयू कैंडिडेट विजयलक्ष्मी कुशवाहा, महाराजगंज में भाजपा उम्मीदवार जनार्दन सिंह सिग्रीवाल और गोपालगंज में आलोक कुमार सुमन के लिए वोट मांगा। गोरेयाकोठी जिला के हिसाब से सीवान में है जबकि लोकसभा के हिसाब से महाराजगंड सीट के अंदर। मोदी ने रैली में आए लोगों से कहा कि वो लौटकर घर-घर जाएं और सबको कहें कि मोदी ने उनको जय श्रीराम बोला है। माना जा रहा है कि पीएम मोदी की रैली से भाजपा समर्थकों में हेना शहाब को लेकर अब कोई भ्रम की स्थिति नहीं बचेगी।
PM मोदी ने बताया कौन है उनका राजनीतिक वारिस, कई दिनों से छिड़ी थी बहस
सीवान सीट पर कुल 13 उम्मीदवार हैं लेकिन मुख्य लड़ाई जेडीयू की विजयलक्ष्मी कुशवाहा, आरजेडी के अवध बिहारी चौधरी और निर्दलीय हेना शहाब के बीच है। सीवान लोकसभा के अंदर छह विधानसभा सीटें हैं जिनमें 2019 के लोकसभा चुनाव में सारी सीटों पर जेडीयू को लीड मिली थी। 2020 के विधानसभा चुनाव में इन छह सीटों में तीन राष्ट्रीय जनता दल, दो सीपीआई-माले और एक सीट भाजपा ने जीती थी।
