बिहार में लोकसभा चुनाव के छह चरणों में कुल 32 सीटों पर हुए मतदान में 29 सीटों पर आधी आबादी पुरुषों से आगे हैं। इनमें 18 सीटों पर तो महिलाओं ने पुरुषों की तुलना में 10 फीसदी तक अधिक मतदान किया है। महिलाओं के इस उत्साह से मैदान में उतरे दोनों गठबंधनों, एनडीए तथा इंडिया के प्रत्याशी इसे अपने-अपने हित में जोड़कर देख रहे हैं। वहीं सियासी जानकारी भी इसका मायने समझने में जुटे हैं।
हालांकि पहले चरण की चार में से तीन सीटों औरंगाबाद, गया (सुरक्षित), नवादा में महिलाओं ने पुरुषों की तुलना में कम वोट किया था। सोमवार को निर्वाचन विभाग ने छह चरणों की सभी सीटों के मतदान प्रतिशत का आंकड़ा जारी किया। सातवें चरण की आठ सीटों के लिए मतदान एक जून को होना अभी बाकी है।
पहले चरण की तीन सीटों पर पुरुषों ने अधिक वोट डाले पहले चरण की तीन सीटों औरंगाबाद में पुरुषों ने 51.22 प्रतिशत तो महिलाओं ने 49.41 प्रतिशत, गया (सु.) में पुरुषों ने 53.89 प्रतिशत तो महिलाओं ने 51.55 प्रतिशत और नवादा में पुरुष मतदाताओं ने 43.70 प्रतिशत तो महिला मतदाताओं ने 42.61 प्रतिशत मतदान किया। वहीं, पहले चरण की सभी चार सीटों औरंगाबाद, गया, नवादा व जमुई में पुरुषों ने 49.59 प्रतिशत वोट डाले तो महिलाओं ने 48.90 प्रतिशत ही वोट डाले।
गर्मी के बावजूद इन 29 सीट जमुई (सु.), किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया, भागलपुर, बांका, झंझारपुर, सुपौल, अररिया, मधेपुरा, खगड़िया, दरभंगा, उजियारपुर, समस्तीपुर (सु.), बेगूसराय, मुंगेर, सीतामढ़ी, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, सारण, हाजीपुर (सु.), वाल्मीकिनगर, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, गोपालगंज (सु.), सीवान व महाराजगंज सीटों पर महिलाएं आगे रही हैं।
दूसरे चरण में कटिहार, तीसरे चरण में सभी पांच सीटों झंझारपुर, सुपौल, अररिया, मधेपुरा व खगड़िया में महिलाओं ने पुरुषों की तुलना में 10 फीसदी अधिक मतदान किया। इनमें चौथे चरण की दरभंगा, उजियारपुर, समस्तीपुर (सु.), 5वें चरण की सीतामढ़ी, मधुबनी एवं छठे चरण की वाल्मीकिनगर, पूर्वी चंपारण, शिवहर, वैशाली, गोपालगंज (सु.), सीवान एवं महाराजगंज सीटें भी शामिल हैं।
आपको बता दें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महिलाओं के बीच अपनी एक अलग इमेज है। आधी आबादी का एक बड़ा वर्ग दोनों का प्रशंसक और अलग-अलग कारणों से पीएम मोदी और सीएम नीतीश को महिलाएं पसंद करती है। फिर चाहे वो केंद्र महिलाओं को लेकर योजनाएं या फिर नीतीश सरकार में जीविका दीदी बनी महिलाएं हो। ऐसे में महिलाओं के पुरुषों से ज्यादा वोट करने से एनडीए को इसका फायदा मिल सकता है।
वही इंडिया अलायंस भी महिलाओं के लिए कई वादे कर रहा। राहुल और तेजस्वी कह रहे हैं कि अगर इंडिया गठबंधन की सरकार आई तो गरीब परिवारों की महिलाओं के खाते में हर महीने साढ़े 8 हजार रूपए आएंगे। एक साल के पूरे एक लाख, ऐसे में देखना होगा कि महिलाओं के ज्यादा वोटिंग का फायदा किसे मिल सकता है।
