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भीषण गर्मी के बीच बिहार की राजधानी पटना में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। शहर में रोजाना 50 लाख लीटर अतिरिक्त पानी की मांग बढ़ गई है। प्रतिदिन राजधानी में एक करोड़ लीटर पानी की आवश्यकता पड़ रही है। इसे पूरा करने में बुडको की ओर से तैयार पांच पानी टंकी को हमेशा भरकर रखने का प्रयास किया जा रहा है। नगर निगम की ओर से 1.75 लाख परिवारों को पेयजल आपूर्ति की जा रही है। हालांकि, जर्जर पाइप लाइन से आपूर्ति प्रभावित हो रही है। भूजल स्तर नीचे जाने पर संकट और बढ़ सकता है।
पटना नगर निगम क्षेत्र में दो लाख 92 हजार 120 परिवार हैं। इसमें सबसे अधिक पाटलिपुत्र अंचल में 80 हजार 889 परिवार रहते हैं। शहर के आसपास के नगर परिषद क्षेत्र में 79 हजार 397 परिवार हैं। अकेले दानापुर नगर परिषद में 51 हजार 159 परिवार रहते हैं। नूतन राजधानी और पटना सिटी अंचल क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति पर सबसे अधिक परिवार निर्भर हैं। कई दलित बस्तियों में पेयजल आपूर्ति पाइप लाइन नहीं है। रुकनपुरा मुसहर टोली में दो सौ परिवार हैं लेकिन पाइप लाइन नहीं है। यहां टैंकर से पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। पटना सिटी अंचल के अधिकांश इलाकों में जर्जर पाइप होने से पानी का प्रेशर नहीं है।

पटना में 24 घंटे में खप रहा एक करोड़ लीटर पानी
बुडको के सहायक अभियंता (जलापूर्ति) विजय कुमार का कहना है कि पांच बड़ी पानी की टंकी है। एक टंकी में 20 हजार लीटर पानी रखने की क्षमता है। अप्रैल के प्रथम सप्ताह तक रोजाना 50 लाख लीटर पानी में काम चल जाता था लेकिन अब 24 घंटे में एक करोड़ लीटर पानी की खपत है। यानि पहले की तुलना में 50 लाख अतिरिक्त पानी की खपत हो रही है। जिन इलाकों में पेयजल की समस्या है, वहां नगर निगम वाटर टैंकर से पानी भेज रहा है। लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। अभी 10 टैंकर हैं जिनेमें मात्र दो बड़े हैं।
