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बिहार के सियासी गलियारे में यह चर्चा तैर रही है कि मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी, वीआईपी लालू और तेजस्वी के सहयोग से महागठबंधन में जा सकती है। कहा जा रहा है कि राजद से मुकेश सहनी की बात बन गई है सिर्फ इसका ऐलान होना बाकी है। इस पर भारतीय जनता पार्टी की प्रतिक्रिया आई है। पार्टी के प्रवक्ता सैयद शाह नवाज हुसैन ने कहा है कि मल्लाह समाज के नेता हरि सहनी हैं। महागठबंधन में वीआईपी के जाने से एनडीए को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए मुकेश सहनी को गठबंधन साथी की तलाश है। वह बीजेपी नेताओं से मिलने दिल्ली भी गए थे।
एक न्यूज़ चैनल से बात करते हुए शाहनवाज हुसैन ने कहा कि मुकेश सहनी की पार्टी का कहीं कोई असर अब नहीं दिख रहा है। बिहार के निषाद समाज के लोग हरि साहनी को अपना नेता मान रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुकेश सहनी की कोई गारंटी नहीं है कि कब तक कहां रहेंगे। मुकेश सहनी का इतिहास यही है कि एक जगह गठबंधन करते हैं, दूसरी जगह प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं और फिर उठकर भाग जाते हैं।
अगर उनका समझौता राजद से हो भी जाता है तो कितने घंटे, कितने मिनट दोनों साथ रहेंगे इस बात की कोई गारंटी नहीं है। दरअसल मुकेश साहनी ने अपनी क्रेडिबिलिटी लूज कर दिया है। राजनीति में उनकी कोई मूल्य नहीं है।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने लालू यादव और तेजस्वी यादव के परिवारवाद वाले ट्वीट पर भी निशाना साधा है। तेजस्वी ने गुरुवार को 14 नेताओं का लिस्ट जारी कर एनडीए में भारी परिवारवाद का आरोप लगाया था। इसके जवाब में शाहनवाज हुसैन ने कहा कि तेजस्वी यादव के पास कुछ ऐसे सलाहकार आ गए हैं जैसे पहले राहुल गांधी के पास पहुंचे थे। उनके सलाहकार ने जो ट्वीट लिखा है उसमें तेजस्वी यादव ने खुद ही सेल्फ गोल कर लिया है इस देश का सबसे बड़ा राजनीतिक परिवार कोई है तो वह नेहरू गांधी परिवार है लेकिन लालू जी का परिवार उससे भी बड़ा है लोकसभा चुनाव का टिकट बांटने में सब कुछ दिख गया है
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मार्ग गठबंधन में एंट्री के लिए मुकेश साहनी खुद प्रयासरत हैं अगर बातें ठीक से बन जाती है तो वीआईपी को 2 से 3 सीटें मिलने की उम्मीद है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मुकेश सहनी वैशाली, झंझारपुर और दरभंगा सीट के लिए बात कर रहे हैं। लेकिन इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है। मुकेश सहनी की पार्टी 2019 में 3 सीटों पर लोकसभा चुनाव लड़ी लेकिन वह अपनी सीट भी नहीं बचा पाए। खगड़िया सेवा खुद चुनाव हार गए।
इस बार वे किसी भी गठबंधन के साथ जाने के लिए तैयार हैं।शर्त इतनी है कि निषाद समाज को आरक्षण मिले। लेकिन अभी तक उन्हें कहीं से बात नहीं बनी है। मुकेश सहनी बीजेपी नेताओं से मिलने दिल्ली भी गए थे।
