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मुजफ्फरपुर के 589 शिक्षकों का लटका वेतन, विभाग ने जारी किया शोकॉज, जानिए क्या है वजह

मुजफ्फरपुर के 589 शिक्षकों का लटका वेतन, विभाग ने जारी किया शोकॉज, जानिए क्या है वजह


शिक्षा विभाग के आदेश के बावजूद एक बार फिर ऑनलाइन हाजिरी नहीं बनाने पर मुजफ्फरपुर के 589 शिक्षकों का वेतन लटक गया है। विभाग ने स्पष्टीकरण भी मांगा है। विभागीय समीक्षा में यह बात सामने आने आई है, कि ई- शिक्षाकोष पर 500 से ज्यादा शिक्षकों ने हाजिरी नहीं लगाई है।

sandeep हिन्दुस्तान, मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाताSat, 12 Oct 2024 07:30 AM
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मुजफ्फरपुर जिले के 486 विद्यालयों के 589 शिक्षकों ने अबतक एक बार भी ऑनलाइन हाजिरी नहीं बनाई है। इन शिक्षक-हेडमास्टर का वेतन बंद करने का आदेश दिया गया है। ऑनलाइन हाजिरी बनाने को लेकर विभागीय समीक्षा में यह सामने आने के बाद कार्रवाई की गई है। डीईओ अजय कुमार सिंह ने इन सभी शिक्षक-हेडमास्टर से सप्ष्टीकरण भी मांगा है। डीईओ ने कहा कि समीक्षा के क्रम में पाया गया कि 486 विद्यालयों के 589 शिक्षक-प्रधानाध्यापक द्वारा अबतक ई-शिक्षाकोष पर उपस्थिति दर्ज नहीं की जा रही है।

इस संबंध में पूर्व में कई बार ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर उपस्थिति दर्ज कराने को निर्देशित किया गया है, लेकिन अबतक उपस्थिति नहीं बनाया जाना खेदजनक है। एक अक्टूबर से सभी शिक्षकों के वेतन का भुगतान ई-शिक्षाकोष पर दर्ज उपस्थिति के आधार पर किया जाना है। ऐसी स्थिति में इन विद्यालयों में पदस्थापित शिक्षकों के वेतन से कटौती होगी और उसके लिए संबंधित शिक्षक, प्रधानाध्यापक, प्रभारी प्रधानाध्यापक स्वयं जिम्मेवार होंगे।

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मुजफ्फरपुर जिले के 486 विद्यालयों के 589 शिक्षकों ने अबतक एक बार भी ऑनलाइन हाजिरी नहीं बनाई है। इन शिक्षक-हेडमास्टर का वेतन बंद करने का आदेश दिया गया है। ऑनलाइन हाजिरी बनाने को लेकर विभागीय समीक्षा में यह सामने आने के बाद कार्रवाई की गई है। डीईओ अजय कुमार सिंह ने इन सभी शिक्षक-हेडमास्टर से सप्ष्टीकरण भी मांगा है। डीईओ ने कहा कि समीक्षा के क्रम में पाया गया कि 486 विद्यालयों के 589 शिक्षक-प्रधानाध्यापक द्वारा अबतक ई-शिक्षाकोष पर उपस्थिति दर्ज नहीं की जा रही है।

इस संबंध में पूर्व में कई बार ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर उपस्थिति दर्ज कराने को निर्देशित किया गया है, लेकिन अबतक उपस्थिति नहीं बनाया जाना खेदजनक है। एक अक्टूबर से सभी शिक्षकों के वेतन का भुगतान ई-शिक्षाकोष पर दर्ज उपस्थिति के आधार पर किया जाना है। ऐसी स्थिति में इन विद्यालयों में पदस्थापित शिक्षकों के वेतन से कटौती होगी और उसके लिए संबंधित शिक्षक, प्रधानाध्यापक, प्रभारी प्रधानाध्यापक स्वयं जिम्मेवार होंगे।

वहीं दूसरी तरफ जिले के 1384 निजी विद्यालयों के बच्चों का कोई सरकारी रिकार्ड नहीं है। ये विद्यालय ऐसे हैं, जिन्हें मान्यता नहीं मिली है। जो विद्यालय मान्यता प्राप्त हैं, उनमें भी 150 से अधिक का आंकड़ा ई-शिक्षा कोष पर नहीं है। जिले में निजी स्कूलों के इस घालमेल पर प्राथमिक शिक्षा निदेशक पंकज कुमार ने जिले के डीईओ को पत्र लिखा है और इन स्कूलों की सूची जारी करते हुए कार्रवाई का निर्देश दिया है।

ई-शिक्षा कोष और संबंधन पोर्टल पर निजी स्कूलों की संख्या में अंतर पर जुर्माना लगाने का आदेश दिया गया है। जिले के निजी स्कूलों की मान्यता को लेकर समीक्षा में यह बात सामने आई है। मान्यता नहीं लेने वाले डेढ़ हजार से अधिक स्कूलों को एक लाख तक का जुर्माना भी लगेगा। यही नहीं, नोटिस के बाद इन्हें बंद करने का आदेश भी दिया गया है। जिले में संचालित सभी निजी विद्यालयों को 10 अगस्त तक ई-संबंधन पोर्टल पर आवेदन प्राप्त कर प्रस्वीकृति प्रदान करने की कार्रवाई करनी थी। निदेशक ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि कोई भी विद्यालय सक्षम प्राधिकार से प्रस्वीकृति का प्रमाणपत्र प्राप्त किये बिना संचालित नहीं हो सकता।

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