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भेड़ियों को पकड़ने में वन विभाग की टीम नाकाम, पिंजरे में कुत्ते और नेवले आकर फंस रहे

भेड़ियों को पकड़ने में वन विभाग की टीम नाकाम, पिंजरे में कुत्ते और नेवले आकर फंस रहे


Wolf Attack: बिहार के गया जिले में भेड़ियों के आतंक से लोग सहमे हुए हैं। इस बीच भेड़ियों को पकड़ने के लिए वन विभाग की टीम नाकाम रही है। खिजरसराय के मकसूदपुर में भेड़ियों को पकड़ने के लिए विभाग की ओर से तीन जगहों पर पिंजरे लगाए गए। उनमें मांस भी डाला गया। मगर बुधवार शाम तक एक भी भेड़िया पिंजरे में नहीं फंसा। ग्रामीणों के मुताबिक भेड़ियों के लिए लगाए गए पिंजरों में कुत्ते और नेवले आकर फंस रहे हैं।

मकसूदपुर गांव में पिछले 11 दिनों से भेड़ियों का खौफ है। भेड़ियों के हमले में पांच लोग घायल भी हो चुके हैं। गांव के निवासी सरोज पंडित, संतन कुमार अक्षय पांडे, सूर्य देव सिंह, टुनटुन सिंह ने बताया कि वन विभाग की टीम दिन में आती है और एक-दो घंटे में वापस लौट जाती है। शाम ढलने के बाद लोग दहशत में जीवन बिताते हैं। शाम होते ही भेड़िये शिकार की तलाश में इधर-उधर घूमने लगते हैं। डर से कोई भी ग्रामीण किले की और नहीं जाता है। लोग दूसरे रास्ते से जाते हैं। अपनी सुरक्षा ग्रामीणखुदकररहेहैं।

खंडहर बने किले में छिपे हैं भेड़िये

दरअसल, गांव में एक ऐतिहासिक किला है, जो कभी मकसूदपुर स्टेट का ठिकाना रहा करता था। इस राजघराने का एक समय में मगध क्षेत्र में रुतबा हुआ करता था। साल 1934 तक यह किला राजा का निवास स्थान रहा। इसके बाद से यह वीरान होता गया। इसके देखरेख की जिम्मेदारी फिलहाल मकसूदपुर स्टेट के वंशज अजय सिंह के पास है। लगभग 35 से 40 बीघा के क्षेत्र में फैला यह किला अब खंडहर में तब्दील हो गया है। इस कारण जंगली जानवरों ने यहां अपना बसेरा बना लिया है। यह किला भेड़ियों का अड्डा बन गया है।

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हालांकि, वन विभाग की ओर से भेड़ियों की गतिविधि होने से इनकार किया जा रहा है। डीएफओ शशिकांत कुमार ने मंगलवार को कहा कि गांव में भेड़िया नहीं बल्कि सियार हैं। उन्हें पकड़ने के लिए वन विभाग ने जाल बिछा रखा है।

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