बिहार के इस मॉडल का बजा डंका, नीतीश की जीविका दीदी की रसोई मोदी के गुजरात समेत कई राज्यों में

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बिहार के विभिन्न सरकारी संस्थाओं में जीविका दीदी की रसोई धूम मचा रही है। अब दूसरे राज्य भी दीदी की रसोई खोलने के लिए इच्छुक हो रहे हैं। इसके लिए जीविका से संपर्क भी किया गया है। बिहार में चल रही दीदी की रसोई में अबतक पंजाब, कर्नाटक और गुजरात सरकार ने दिलचस्पी दिखाते हुए अपने यहां भी इसे खोलने की इच्छा जताई है।

इस बाबत कई बार बिहार आकर अधिकारी कार्यशैली देख गए हैं। बिहार में 2018 से जीविका के तहत दीदी की रसोई चलती है। इसमें ग्रामीण महिलाओं को जोड़ा गया है। यह सूबे के 38 जिलों में है। अब तक दो हजार से अधिक महिला उद्यमी इससे जुड़ी हैं। इसके तहत अस्पताल, स्कूल, बैंक और विभिन्न सरकारी कार्यालयों में कैंटिन भी है। यहां सस्ता और स्वच्छ खाना उपलब्ध करवाया जाता है। अभी राज्य भर में दो सौ से अधिक स्थानों पर दीदी की रसोई है। इसी को देखकर अन्य राज्य भी अपने यहां इसे शुरू करने की इच्छा जता रहे हैं।

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करार के बाद जीविका की ओर से दिया जाएगा प्रशिक्षण

जिन राज्यों में दीदी की रसोई शुरू होगी, वहां पर तकनीकी सहयोग जीविका की तरफ से उपलब्ध कराया जाएगा। जल्द ही इन राज्यों के बीच एकरारनामा भी होगा। इसके बाद जीविका द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा और फिर योजना बनाई जाएगी। दीदी की रसोई से ग्रामीण महिलाओं के रोजगार मिल रहा है। बड़ी आबादी को घर जैसा खाना मिल रहा है। अस्पतालों में चल रही दीदी की रसोई लोकप्रिय हुई है। अन्य राज्य भी अपने यहां सरकारी अस्पतालों में दीदी की रसोई शुरू करने पर फोकस कर रही है।

50 हजार से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं रसोई से

दीदी की रसोई से 50 हजार से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। ये महिलाएं समूह में काम करती हैं। इनकी रसोई में एक साथ दस से 12 महिलाएं होती हैं। मांग के अनुसार अलग-अलग पकवान बनाती हैं। अस्पतालों में जहां मरीजों के अनुसार खाना बनाया जाता है वहीं मेला आदि में तरह-तरह के पकवान होते हैं।

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