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पटना एम्स के डीन और IGIMS डायरेक्टर के बेटे गलत ओबीसी सर्टिफिकेट मामले में फंसे, जांच शुरू

पटना एम्स के डीन और IGIMS डायरेक्टर के बेटे गलत ओबीसी सर्टिफिकेट मामले में फंसे, जांच शुरू


नियमों के खिलाफ जाकर नॉन क्रीमी लेयर का ओबीसी सर्टिफिकेट का इस्तेमाल करके नौकरी हासिल करने के मामले में पटना एम्स के डीन और आईजीआईएमएस के डायरेक्टर के बेटों के खिलाफ जांच कमिटी गठित की गई है।

Jayesh Jetawat पटना, हिन्दुस्तान टाइम्सTue, 8 Oct 2024 05:58 PM
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बिहार की राजधानी पटना में स्थित एम्स के डीन (रिसर्च) डॉक्टर प्रेम कुमार और आईजीआईएमएस के डायरेक्टर डॉक्टर बिंदे कुमार के बेटों के खिलाफ गलत ओबीसी सर्टिफिकेट मामले में जांच शुरू कर दी गई है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने सोमवार को इस मामले में जांच गठित की। आरोप हैं कि वरिष्ठ चिकित्सकों के बेटों ने नियमों के खिलाफ जाकर नॉन क्रीमी लेयर ओबीसी सर्टिफिकेट के जरिए एम्स में पोस्टिंग ली थी। जांच कमिटी यह पता लगाएगी कि इनके द्वारा पिछले साल प्रस्तुत किए गए जाति प्रमाण पत्र सही हैं या नहीं।

एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक डॉ. कृष्ण पाल ने मंगलवार को कहा कि संस्थान के मुख्य निगरानी अधिकारी डॉ. संजय पांडेय की अध्यक्षता में सात सदस्यों की एक कमिटी गठित की गई है। यह कमिटी 15 अक्टूबर को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। जांच टीम को कहा गया है कि वह स्थानीय प्रशासन से संपर्क कर यह पता लगाए कि दोनों ने नॉन क्रीमी लेयर ओबीसी सर्टिफिकेट किस आधार पर हासिल किए थे।

जांच कमिटी में पटना एम्स के डिप्टी डायरेक्टर निलोत्पल बाल के अलावा प्रमोद कुमार मांझी, असीम सरफराज, राज कुमार जलान, सतीश कुमार सिंह और सनी प्रियदर्शी को शामिल किया गया है।

दूसरी ओर, पटना के डीएम चंद्रशेखर ने पिछले हफ्ते डॉक्टर कुमार सिद्धार्थ को नॉन क्रीमी लेयर ओबीसी सर्टिफिकेट जारी किए जाने के मामले में जांच के आदेश दिए थे। डीएम ने बताया कि सिद्धार्थ एम्स के डीन डॉक्टर प्रेम कुमार के बेटे हैं। उनका गलत जाति प्रमाण पत्र जारी किए जाने की शिकायत मिली थी। पटना सदर के अनुमंडल पदाधिकारी से भी इस मामले में जानकारी मांगी गई है।

ये भी पढ़े:IGIMS डायरेक्टर के बेटे का ओबीसी सर्टिफिकेट रद्द, विवाद के बाद दिया था इस्तीफा

बता दें कि डीन प्रेम कुमार के बेटे डॉ. सिद्धार्थ की पिछले साल दिसंबर में फिजियोलॉजी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति हुई थी। सिद्धार्थ ने इस पोस्टिंग के लिए अपना नॉन क्रीमी लेयर ओबीसी सर्टिफिकेट दिखाया था। सिद्धार्थ की नियुक्ति के बाद से एम्स प्रशासन को ईमेल के जरिए फर्जीवाड़े की शिकायत मिली थी। नियमों के मुताबिक केंद्र और राज्य सरकार में ग्रुप ए या वर्ग एक स्तर के अधिकारियों के बेटे-बेटियों को क्रीमी लेयर में रखा जाता है। वे नॉन क्रीमी लेयर जाति प्रमाण पत्र का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं।

इसी तरह, पटना के इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आईजीआईएमएस) के डायरेक्टर डॉ. बिंदे कुमार के बेटे डॉ. हर्षित राज के नॉन क्रीमी लेयर ओबीसी सर्टिफिकेट पर भी विवाद उठा। इसके बाद उन्होंने पटना एम्स से 26 सितंबर को इस्तीफा दे दिया। हर्षित एम्स में फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग में ट्यूटर के पद पर नियुक्त थे। इसके बाद उन्होंने पटना जिला प्रशासन को अपना जाति प्रमाण पत्र रद्द करने का आवेदन भी दिया। इस पर संज्ञान लेते हुए डीएम चंद्रशेखर ने हर्षित राज का नॉन क्रीमी लेयर ओबीसी सर्टिफिकेट रद्द कर दिया था।

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