सुपौल जिले में बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस के 12वीं बटालियन में छह महीने के पीटीसी ट्रेनिंग के लिए विभिन्न जिलों से आए 935 जवान सोमवार को परेड ग्राउंड में मेस की अनियमितता और संसाधन की कमी को लेकर भूख हड़ताल पर बैठ गए। इस दौरान प्रशिक्षु जवानों ने 12वीं बटालियन के कमाडेंट और मेस इंचार्ज के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जवानों का कहना था कि बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस 12वीं बटालियन में केवल 400 जवानों के ही प्रशिक्षण की व्यवस्था है, लेकिन यहां प्रशिक्षण के लिए 935 प्रशिक्षुओं को रखा गया।
जवानों ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षुओं को बैठने तक की व्यवस्था नहीं है। हम लोगों को नीचे बैठकर प्रशिक्षण लेना पड़ता है। शौचालय की स्थिति दयनीय है। गदंगी का अंबार है। किसी शौचालय का दरवाजा टूटा है। जंगली इलाके होने के कारण सांप और बिच्छू का डर बना रहता है। शुद्ध पेयजल तक की व्यवस्था नहीं है। पिछले साल साफ पानी नहीं होने और गंदगी की वजह से लगभग 200 जवान टायफायड के शिकार हो गए थे।
मेस एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष उम्मीदवार डॉ. अमिताभ बच्चन ने बताया कि प्रशिक्षु जवानों ने रविवार की सुबह पूरी, छोला और जलेबी नाश्ते में दी गई थी। इसके बाद एक जवान की थाली में सल्फास की पोटली मिली। इसके बाद सभी जवानों ने नाश्ता छोड़ दिया। कुछ जवानों को पेट दर्द, छाती दर्द, कंठ में जलन और उल्टी होने लगी। आनन-फानन में भीमनगर में मेडिकल की दुकान से दवा लेकर जवान खाने लगे, लेकिन जवानों की स्थिति ठीक नहीं हुई। इसके बाद अफरा-तफरी का माहौल हो गई। सभी जवान अनुमंडल अस्पताल पहुंचने लगे, जहां प्रशिक्षुओं का आंकड़ा 265 तक पहुंच गया।

अनुमंडल अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. शैलेन्द्र दीपक ने बताया कि अस्पताल में 265 प्रशिक्षुओं की रजिस्टर एंट्री हुई है। जगह के अभाव में जिनकी तबीयत ठीक होती गई उन्हें डिस्चार्ज किया जाने लगा। वैसे कई जवानों की नार्मल जांच ही की गई। उधर, भूख हड़ताल पर बैठे प्रशिक्षुओं का कहना था कि रविवार की सुबह के बाद खाना नहीं बना है। हम लोग पूरी तरह हड़ताल पर है। जब तक कोई वरीय पदाधिकारी इस मामले में पहल नहीं करते हैं। तब तक हम लोगों की हड़ताल जारी रहेगा। सूचना पर पहुंचे बीएसएपी 12वीं बटालियन के डीआईजी शफीउल हक ने भूख हड़ताल बैठे प्रशिक्षु जवानों से बातचीत की।
सभी प्रशिक्षु जवानों ने रविवार की घटना एवं बुनियादी सुविधाओं को लेकर डीआईजी को अवगत कराया। डीआईजी ने बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने की बात कही। इसके बाद प्रशिक्षु जवानों अपना भूख हड़ताल तोड़ा। मौके पर कमांडेंट अशोक प्रसाद, एसडीएम नीरज कुमार, डीएसपी रामनरेश पासवान, सीएस डॉ. ललन ठाकुर, डॉ. शैलेन्द्र दीपक, भीमनगर थानाध्यक्ष दीपक कुमार आदि मौजूद थे।
डीआईजी शफीउल हक ने कहा कि हमने खुद से जांच शुरू कर दी है। सभी बैरक का निरीक्षण किया गया है। जिस जवान के थाली से सल्फास निकला था उसे जब्त कर जांच कर रहे हैं। दो लोगों पर एफआईआर की कार्रवाई की जा रही है। सभी जवानों की समस्याओं को सुना गया। इसके बाद मैस का चार्ज सभी आठ कंपनी को ही दे दिया गया। वह अपने हिसाब से मैस का संचालन करेंगे।
आज से मेस की व्यवस्था बदल जाएगी। खाना जवानों के अनुसार ही बनेगा। कोई भी अधिकारी जवानों की शिकायत को नजर अंदाज नहीं करेंगे। जो पैसे मेस संचालक को दिए गए हैं, उसमें खर्च किये गए पैसे को काटकर शेष राशि मेस संचालक लौटाएंगे। अगर वे ऐसा नहीं करते है तो उन पर केस दर्ज किया जाएगा। किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं की जाएगी। तीन साल पुराने भवन की यह स्थिति नहीं होनी चाहिए। इस मामले में भी जांच की जा रही है। साफ सफाई की बेहतर व्यवस्था की जाएगी।
फूट प्वाइनिंग के शिकार हुए सभी प्रशिक्षु जवान खतरे से बाहर बताए जाते हैं। अस्पताल से सभी को छुट्टी मिल गई है। मालूम हो कि रविवार की शाम बीएमपी 12वीं और 15वीं बी बटालियन के 265 ट्रेनी जवानों की खाना खाने के बाद तबीयत बिगड़ने की शिकायत पर अनुमंडल अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिससे अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जवानों को उल्टी, छाती में जलन एवं धबराहट की शिकायत हुई थी।
इसमें आठ जवानों को इमरजेंसी में भर्ती किया गया था। शेष को ओपीडी के माध्यम से इलाज किया गया। अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. शैलेन्द्र दीपक ने बताया कि इलाजरत दस जवानों ने सोमवार की सुबह में भी अपनी कुछ परेशानी को लेकर ओपीडी में दिखाया। स्थिति सामान्य है। घबराने की कोई बात नही है। सभी जवान खतरे से बाहर हैं।
बीएमपी कमाडेंट अशोक प्रसाद ने बताया कि भोजन तैयार करने और उसकी निगरानी रखने के लिए पांच ट्रेनी जवानों की टीम बनाई गई है। किसी प्रकार की दिक्कत अगर भोजन तैयार करने में दिखी तो अधिकारी को रिपोर्ट करनी चाहिए थी। अगर कहीं कोई गड़बड़ी हुई है तो हम उसकी जांच कर रहे है। दोषी व्यक्ति पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।
