केंद्र सरकार से अपना सारा बकाया मांगेगा बिहार, हर विभाग से हिसाब ले रहे नए मुख्य सचिव

केंद्र सरकार से अपना सारा बकाया मांगेगा बिहार, हर विभाग से हिसाब ले रहे नए मुख्य सचिव


बिहार अब अपने हिस्से की पाई-पाई केंद्र सरकार से मांगेगा। इसके लिए जल्द ही नीतीश सरकार केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को अपने बकाये का पूरा हिसाब भेजेगी। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। हाल ही में बिहार के मुख्य सचिव पद पर नियुक्त हुए अमृत लाल मीणा ने इस संबंध में राज्य के सभी विभागों से रिपोर्ट तलब की है। उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे केंद्रीय योजनाओं की बकाया राशि की गणना करके इसका ब्योरा दें। योजना एवं विकास विभाग की ओर से इसका पूरा लेखा-जोखा तैयार कर रहा है।

पिछले दिनों मुख्य सचिव अमृत लाल मीणा के स्तर पर हुई उच्चस्तरीय बैठक के साथ अलग से हुई विभागीय बैठक में इस पर चर्चा हुई थी। इसमें केंद्र सरकार के पास बड़ी मात्रा में राशि के बकाया होने की बात सामने आई थी। इसके अलावा केंद्रीय योजनाओं की राशि लौटने और विभागीय खर्च में समस्या का भी मामला आया था। इसके बाद मुख्य सचिव ने तमाम विभागों को केंद्रीय राशि की पूरी विवरणी तैयार करने का टास्क सौंपा है।

सभी विभाग अपने-अपने यहां केंद्र सरकार के पास बकाये का हिसाब कर रहे हैं। विभागीय स्तर पर राशि की गणना होने के बाद राज्य सरकार केंद्र को पत्र लिखेगी। योजना एवं विकास विभाग सभी विभागों के साथ समन्वय करके इसे तैयार कर रहा है।

शिक्षा एवं ग्रामीण विकास की सर्वाधिक राशि बकाया

समीक्षा के क्रम में यह बात भी सामने आई है कि शिक्षा विभाग के साथ-साथ ग्रामीण विकास विभाग की सर्वाधिक राशि केंद्र के पास बकाया है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत केंद्र से मिलने वाली राशि का बड़ा हिस्सा आज भी बकाया है। छात्रवृत्ति से जुड़ी योजनाओं की राशि का भुगतान भी लंबित है। यही नहीं, मध्याह्न भोजन योजना की राशि भी केंद्र से आनी है। इसी तरह मनरेगा की राशि भी केन्द्र के पास बकाया है। पीएम आवास योजना समेत ग्रामीण विकास से जुड़ी कई योजनाओं की राशि केंद्र के पास अटकी पड़ी है। इनमें से कई योजनाओं पर राज्य सरकार को अपने संसाधन से खर्च करना पड़ता है। इससे खजाने पर अनावश्यक बोझ बढ़ता है।

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केंद्रीय योजनाओं का पैसा न लौटे, यह भी होगा सुनिश्चित

राज्य सरकार यह भी सुनिश्चित करेगी कि केंद्र से आने वाली राशि किसी सूरत में वापस न लौटे। उसका सही और व्यावहारिक उपयोग हो सके। योजनाओं में उसे खर्च किया जाए। इसके लिए विभागों को योजनाओं को लेकर अपने आंतरिक खर्च को बढ़ाना होगा। उनका समय पर उपयोग करना होगा। मुख्य सचिव ने अपनी बैठक में इसको लेकर भी विभागों को कड़े निर्देश दिए हैं। दरअसल, केंद्र से बिहार को विभिन्न योजनाओं के तहत लगभग 25 हजार करोड़ की राशि मिलती है। मगर इनमें से कई योजनाओं में राशि खर्च नहीं हो पाती है। कई में थोड़ी-बहुत राशि खर्च होती है। एक समीक्षा के क्रम में हैरतअंगेज तथ्य सामने आया, जिसमें बताया गया कि कई योजनाओं में तो आधी राशि वापस लौट गई। माना जा रहा है कि 35-40 फीसदी राशि का वास्तविक उपयोग नहींहोपारहाहै।

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