अपनी जमीन देने से किसानों के इंकार और भूमि अधिग्रहण में हो रही देरी के चलते केंद्र की बक्सर थर्मल पावर प्लांट योजना अधर में लटक गई है। एसजेवीएन लिमिटेड, बिहार स्टेट पावर (होल्डिंग) कॉर्पोरेशन कंपनी और बिहार पावर इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी के बीच हुए समझौते तहत 1320 मेगावाट कोयला आधारित बिजली संयंत्र का निर्माण 2019 में शुरू किया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 मार्च 2019 को करीब 10,000 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले प्लांट की आधारशिला रखी थी।
कार्य के निर्माण के तुरंत बाद, एसजेवीएन लिमिटेड के तत्कालीन अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक (सीएमडी) नंद लाल शर्मा ने कहा था कि संयंत्र सितंबर 2023 तक पूरी तरह से चालू हो जाएगा। लेकिन जिला प्रशासन अभी तक लगभग 200 एकड़ भूमि का अधिग्रहण नहीं कर पाया है। जो संयंत्र को महत्वपूर्ण कोयला और जल संपर्क प्रदान करेगा।

बक्सर के डीएम अंशुल अग्रवाल ने भूमि अधिग्रहण में समस्याओं को स्वीकारते हुए, उम्मीद जताई कि वो किसानों को समझाने में सफल होंगे और लिंकेज के लिए जरूरी भूमि संयंत्र को सौंप दी जाएगी। जिला प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा पर्याप्त मुआवजे के अलावा, हम प्रभावित किसानों को राहत और पुनर्वास राशि की भी पेशकश कर रहे हैं, जो 750 दिनों की मजदूरी के बराबर है। किसान अब धीरे-धीरे आगे आ रहे हैं
संयंत्र के निर्माण में अत्यधिक देरी ने केंद्र सरकार को चिंतित कर दिया है, जिसने जमीनी हकीकत का जायजा लेने और मुद्दों को हल करने के लिए केंद्रीय ऊर्जा सचिव पंकज अग्रवाल को भेजा था। केंद्रीय सचिव ने 12 अगस्त को जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक करने के बाद संयंत्र स्थल का दौरा किया था। उन्होंने बिहार राज्य किसान सभा के महासचिव अशोक प्रसाद सिंह और बिहार के दिनेश कुमार के नेतृत्व में किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ भी बातचीत की थी। भारतीय किसान संघ के प्रभारी ने उन्हें संयंत्र के लिए भूमि के असंगत क्षेत्र के अधिग्रहण पर किसानों के बीच व्याप्त अशांति से अवगत कराया।
किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन चौसा रेलवे स्टेशन से प्लांट तक रेलवे ट्रैक बिछाने के लिए लगभग 20-22 किमी लंबी ‘उपजाऊ’ भूमि का अधिग्रहण करने पर तुला हुआ है, जो मुश्किल से 3 किमी दूर है। अशोक सिंह ने केंद्रीय सचिव के साथ बैठक के दौरान कहा, इसी तरह, गंगा नदी से पाइपलाइन बिछाने के लिए 10-12 किमी भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है, जिसे आसानी से कम किया जा सकता है।
किसानों द्वारा मुख्य संयंत्र (1048 एकड़) के लिए भूमि अधिग्रहण में अपर्याप्त मुआवजे के आरोपों के कारण स्थानीय लोगों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें भी हो चुकी हैं। 21 मार्च को संयंत्र स्थल के पास किसानों और पुलिस के बीच झड़प हो गई थी, जिसमें महिलाओं और बुजुर्गों समेत कई ग्रामीणों को बेरहमी से पीटा गया था और परियोजना की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में गिरफ्तारी हुई थी। कुछ ग्रामीण अभी भी जेल में हैं। जबकि कई अन्य गिरफ्तारी से बच रहे हैं। इससे पहले 11 जनवरी 2023 को मुआवजे को लेकर ग्रामीणों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हुई थी।
किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि भूमि अधिग्रहण के नए दौर को लेकर स्थानीय किसानों में असंतोष है। और अगर तुरंत सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो कोई भी अप्रिय घटना हो सकती है। जिले के अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने चौसा रेलवे स्टेशन से रेलवे ट्रैक के लिए लगभग 137 एकड़ जमीन और प्लांट से गंगा नदी तक पाइपलाइन बिछाने के लिए 71 एकड़ जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, कि लगभग 80-85 किसानों ने मुआवजा ले लिया है और उनकी जमीन के बदले मुआवजा देने के लिए अगले महीने एक और शिविर आयोजित किया जाएगा। 1300 से अधिक किसान हैं, जिनकी भूमि का अधिग्रहण किया जाना तय है। लेकिन केवल मुट्ठी भर लोग, जिनके पास बहुत कम हिस्सेदारी थी और मुकदमेबाजी में जमीन थी, जमीन छोड़ने के लिए सहमत हुए हैं। दूसरी ओर, किसान नेताओं ने दावा किया कि जिला अधिकारी रेलवे और जल संपर्क के लिए भूमि अधिग्रहण करने के लिए हर तरह की चालें अपना रहे हैं।
